हम नहीं होंगे
बरसातें तो जरूर होगी लेकिन उनमें भीगने वाले हम नही होंगे...
तालिमें भी बहुत होगी लेकिन सीखने वाले हम नही होंगे...
कविताएं तो जरूर होगी लेकिन उन्हें लिखने वाले हम नही होंगे...
हमारी तस्वीरें तो काफी होगी लेकिन उनमे दिखने वाले हम नही होंगे।
यें बाग यही होगे लेकिन उन्हें को सींचने वाले हम नहीं होंगे...
चीखें तो काफी सुनाई देगी लेकिन चीखने वालें हम नही होंगे...
ख्याल तो काफी होगे लेकिन उन्हें बुनने वालों हम नही होंगे...
तारीफ़े तो काफी होगी लेकिन उन्हे सुनने वाले हम नही होंगे।
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